अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जहां अधिकतर महिलाओं ने अपने अधिकारों की मांग की। वहीं सड़क के किनारे बनी दीवार के पत्थरों को रंगने में मशगूल ये महिलाएं नारी सशक्तिकरण का अर्थ नहीं जानती, इनकी चिंता सिर्फ यह है कि काम नहीं मिला तो चूल्हा कैसे जलेगा।
मेरी खुद के साथ-साथ दूसरों में भी रुचि है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की गलियों में पला-बढ़ा। तीर्थराज प्रयाग (इलाहाबाद) से चला और गुरुओं व पीरों की धरती (पंजाब), देवभूमि हिमाचल प्रदेश के बाद आजकल राष्ट्रीय राजधानी (दिल्ली) में कर रहा हूं विचरण।
फिलहाल मेरे मोबाइल का नंबर है 9899913363.
1 Comments:
तबके में बँटा समाज..
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